अंतिम पड़ाव
बहुत सारे अपराध हुए कुछ जान बूझकर (ज़्यादातर) और कुछ अंजाने में। कई बार मैं प्रायश्चित करता हूँ और इस बात का प्रयास करता हूँ कि अब आगे ऐसी ग़लतियाँ न हों। पिछली शाम से ही बार बार मन में आ रहा है कि जीवन से सन्यास ले लूँ। यह सही समय है धीरे-धीरे दूर होने का, इसके पहले कि कहानी ख़त्म हो, मैं कम से कम ईमानदारी से स्वीकार करूँ कि हमने ग़लत किया जिसको दूसरों ने बड़ी ईमानदारी के साथ मुझे माफ़ क़िया, ईश्वर उन्हें आशीर्वाद दे और मुझे उन ग़लत कर्मों का कष्ट।
प्रिय “हैपी” मेरी तुमसे से विनती है की जब भी मेरा अंत हो तो वह अंतिम संस्कार के पहले नॉ ही मेरे घर में और नॉ ही स्वाति के घर में किसी को बताए। यह मेरी एक बड़ी इच्छा है। मेरे कुछ लोकल दोस्तों को बुलाकर वह मेरी अस्थि / निशान, अग्नि को समर्पित कर दे। मैं नहीं चाहता कि मेरे जाने के बाद कोई मेरे लिए परेशान होए। प्रयास कर रहा हूँ कि माता- पिता, स्वाति और बच्चों के लिए कुछ छोड़कर जाऊँ जो उनके लिए थोड़ा जीने में मदद कर सके। मेरे दोस्तों में; अरुण खेतान, जय कोकाते, माधवन, रविंद्र रघुवंशी, अमित पाठक, अरुण गौड़, संदीप अरोड़ा को मेरे अंतिम संस्कार के लिए बुला लेना।
बहुत सारे अपराध हुए कुछ जान बूझकर (ज़्यादातर) और कुछ अंजाने में। कई बार मैं प्रायश्चित करता हूँ और इस बात का प्रयास करता हूँ कि अब आगे ऐसी ग़लतियाँ न हों। पिछली शाम से ही बार बार मन में आ रहा है कि जीवन से सन्यास ले लूँ। यह सही समय है धीरे-धीरे दूर होने का, इसके पहले कि कहानी ख़त्म हो, मैं कम से कम ईमानदारी से स्वीकार करूँ कि हमने ग़लत किया जिसको दूसरों ने बड़ी ईमानदारी के साथ मुझे माफ़ क़िया, ईश्वर उन्हें आशीर्वाद दे और मुझे उन ग़लत कर्मों का कष्ट।
प्रिय “हैपी” मेरी तुमसे से विनती है की जब भी मेरा अंत हो तो वह अंतिम संस्कार के पहले नॉ ही मेरे घर में और नॉ ही स्वाति के घर में किसी को बताए। यह मेरी एक बड़ी इच्छा है। मेरे कुछ लोकल दोस्तों को बुलाकर वह मेरी अस्थि / निशान, अग्नि को समर्पित कर दे। मैं नहीं चाहता कि मेरे जाने के बाद कोई मेरे लिए परेशान होए। प्रयास कर रहा हूँ कि माता- पिता, स्वाति और बच्चों के लिए कुछ छोड़कर जाऊँ जो उनके लिए थोड़ा जीने में मदद कर सके। मेरे दोस्तों में; अरुण खेतान, जय कोकाते, माधवन, रविंद्र रघुवंशी, अमित पाठक, अरुण गौड़, संदीप अरोड़ा को मेरे अंतिम संस्कार के लिए बुला लेना।
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